सोमवार, 11 मई 2009

चादर




शहर के नामी-गिरामी, कुख्यात-विख्यात सभी परेशान थे. कभी केस मुकदमा, कभी वारंट, कभी जेल, कभी गैंगवार का भय तो कभी पुलिस का. कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए. तंग आकर सभी श्री कृष्ण के पास पहुँचे और बोले, ‘‘महाराज, हम सब तंग आकर आपकी शरण में आए हैं. हम सब सुख चैन की जिन्दगी चाहते हैं. आपका आशीर्वाद चाहिए’’श्री कृष्ण मुस्कराये और बोले, ‘‘अब आया है ऊँट पहाड़ के नीचे....खैर...तुम लोगों को निराश नहीं करूँगा. ऐसा करो...तुम सब ‘होलिका’ बुआ के पास चले जाओ और राजनीतिका चादर ओढ़ लो. सब ठीक हो जायेगा...और समझ गये न...’’श्री कृष्ण का इशारा समझ कर सभी एक-एक ब्रीफकेस लेकर ‘होलिका’ बुआ के पास गए और राजनीति की चादर लेकर सुख चैन की जिन्दगी जीने लगेगालीसाँप अपने बच्चे को लिए नेवले घर पहँुचा और फुँफकारते हुए बोला, ‘‘नेवले, तुम्हारे बेटे ने हद कर दी. आज उसने मेरे बेटे को गाली दी.’’नेवला शांत रहा. धैर्य के साथ साँप के बच्चे के सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए पूछा, ‘‘बताओ बेटे, क्या बात है?’’साँप के बेटे ने राते हुए कहा, ‘‘अंकल स्कूल से लौटते समय गलती से मेरे थैले से जरा सी चोट लग गयी. इतनी सी बात पर वो गुसा गया और मुझे गाली दी. मुझे ‘अफसर’ कहा.’’इसी बीच नेवला का बच्चा आ गया और बोला, ‘‘नहीं अंकल ये झूठ बोलता है. पहले इसने मुझे गाली दी. इसने मुझे ‘नेता’ कहा.’’ साँप और नेवला दोनो असमंजस में थे. अपने-अपने बच्चे को डाँटते हुए कहा, ‘‘यही सब सीखने स्कूल जाते हो... खबरदार जो इस तरह की गाली जुबान पर लायी...’’

विजय रंजन

1 टिप्पणी:

  1. ब्लॉग पर कमेन्ट कर उत्साहवर्धन करने के लिए आभार.
    दिशा निर्देशित करते रहें.

    सादर
    आर्यावर्त

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